Monday, 27 May 2024

Palestine

The West inks red lines
filled with beheaded kids, 
of people peeled inside out,

And the rest of us hung dry. 

Will the winds turn?
If they do, what becomes of us?
If they don't, who are we? 

Friday, 22 December 2023

हलकान

थक चुकी हूँ मैं
इस इंतजारी में,
और तुम?

कि बने बेहतर,
खूबसूरत और मेहरबां दुनिया?

चलो चाकू ले,
बींच चीर दे दुनिया
देखें, चमडी खा रहे हैं, 
कौन से कीड़े, दुनिया

Hindi Tr. of Langston Hughes' Tired

Wednesday, 11 October 2023

हमारी मिट्टी के लिए

हमारी मिट्टी के लिए,
वही जो है ईश्वर के वचन के समीप,
बादलों की छत। 

हमारी मिट्टी के लिए, 
वही जो है संज्ञा के विशेषणों से परे, 
एक बेसुध नक्शा। 

हमारी मिट्टी के लिए, 
वही जो है नन्ही तिल सी, 
दिव्य क्षितिज... और गहरी खाई। 

हमारी मिट्टी के लिए, 
वही जो है तीतर-पंखों सी अभागी, 
पावन ग्रंथ.. और आहत पहचान। 

हमारी मिट्टी के लिए, 
वही जो है उधड़ी पहाड़ियों से घिरी, 
नये अतीत के घात। 

हमारी मिट्टी के लिए, जंग का ईनाम, 
तड़पते धधकते मरने की आज़ादी, 
और हमारी मिट्टी, लाल रात में, दूर से चमकती मणी, रोशन करती बाहरी दुनिया... 
और हम, भीतर, 
और भी घुटते हुए। 

(Hindi tr. of Mahmoud Darwish's 'To our land' tr. in Eng by Fady Joudah) 

Tuesday, 27 December 2022

मैं नए साल में जा रही हूं

और गए साल वापस आ रहे हैं
बालों से गुजरती हवा के माफ़िक 
जैसे मजबूत उंगलियां थामे
मेरे तमाम पुराने वादे और
मुश्किल होगा झटक देना
वो जो मैंने खुद से
खुद के बारे में कहा 
जब मैं थी सोलह की और
छब्बीस की और छत्तीस की
छत्तीस भी पर
मैं नए साल में जा रही हूं
और अपनी चाहतों को मांगते हुए और
जा रही हूं खुद को माफ करने

Hindi trans of Lucille Clifton's I am running into a new year.

Saturday, 24 December 2022

रात जगे

धुमैली है
नीली नदी
सुबह और शाम सतत।
धुमैला प्रकाश बिछा
भोर और सांझ पर्यंत।
रात में जगी, सोचती हूं,
मुझमें अभी ये शांति
शुरआत है कि अंत।

Hindi Trans of Jack Gilbert's Waking at Night

Friday, 26 August 2022

खयाल

यह मेरा करतब है
शुरुआती दौर में
वो बन जाना
जिसे तुम जानना चाहो
फिर वैसा रहने में
लाखों कुशल तरीकों से
चूकते जाना 
हमारी सदी के गुजरने तक।

Hindi Trans. of Tom Snarsky's Wish

Tuesday, 16 August 2022

हल्की बूंदाबांदी

दिनभर सितारे देखतें हैं दूर से
माँ बोली अब चलती हूं
तुम तन्हा हुई तो भी सब ठीक होगा
तुम्हे पता हो या नही तुम्हे पता होगा
बूढ़े घर को सुबह बारिश में देखना
फूल पानी ही तो हैं
सफेद बादलों से उन्हे जगाता सूरज
पहाड़ी पैबेंदकारी को चूमते
परवर्ती जीवन के धुले रंग
जो यहां थे तुम्हारे होने से बहुत पहले
जलती हुई दुनिया में भी 
देखो जागते हैं वो निसंदेह
(Hindi Trans of W.K Merwin's Rain Light)

Saturday, 13 August 2022

विकल्प

 मैं, पौधों की छटाई करने,

घर के पहाड़ी रूख की तरफ गई, ताकि पहाड़ी बर्फ साफ़ दिखे। जब, हाथों में कुल्हाड़ी लिए, ऊपर देखा, ऊपरी शाखाओं में एक घोंसला दिखा। मैंने उसे नहीं काटा। मैंने औरों को भी नहीं काटा। अचानक, हर पेड़ में, अनदेखा घोंसला, जहां पहाड़ होता।
(Hindi Trans. of Alice Walker's Choices)

Friday, 12 August 2022

फिर भी

इश्क़, गर इश्क़ है, मिटता नही
हममें ही रच बसता है,
जैसे जमीन से लिपटा सोना,
कि धूप खिले,
जी उठे।
(Hindi trans. of Alice Walker's Even So)

Sunday, 7 August 2022

एक झरने में, रेक्जाविक

मुझे अभी भी लगता है,

कि दुनिया
वो रोटी है
जो आधी
तुम्हारे लिए ही
मैं थामे खड़ी हूं।

(Hindi Trans. of Eileen Myles- 'At a waterfall, Reykjavik')

Wednesday, 3 August 2022

वहां पहुँचना...

दिमाग़ कहे: यह नदी हैं हर तल से परे दिल कहे: बनाए यहीं पूल के सिलसिले

(Hindi trans. of Cleo Wade's Getting There)

Friday, 8 May 2020

गर चाँद ना हो, तो क्या होगा?

महीने ना होंगे,
ठहरा हुआ समंदर होगा,
ना ज्वार-भाटे,
ना चमकीली रातें,
ना तारों की लुप्पा-छुप्पी,
ना चहरे, ना चंदा के तराने होंगे,
ग्रहण का डर होगा,
जगह नही, खड़े हो, देख सको
दुनिया का जी उठना।

(Hindi trans. of Rebecca Elson's What if there were no moon?)

Wednesday, 22 January 2020

Moving on

I
Memory maps
unfold to let go a drifter.
A question lingers -
how do you nourish (without) your
sources of affection, Mister?

II
(A friend responds)

A question lingers,
do you have a yen to nurture?
If yes, how did your hard edges come about?
I have been told, guess his affection, when in doubt.

Tuesday, 21 January 2020

बस इतनी सी बात है...


I
कुछ मोहब्बतें बिस्तर में सिमटती हैं,
कुछ रूह में उतरती है,
और कुछ बस खामाखाँ होती हैं,
क्या ही होता जो
मेरी रूह तेरा बिस्तर होती।

II
कुछ मोहब्बतें बिस्तर में सिमटती हैं,
कुछ रूह में उतरती है,
और कुछ बस खामाखाँ होती हैं,
कुछ इधर, कुछ उधर
तुम खामाखाँ ही हो,
ना इधर, ना उधर।

Sunday, 19 January 2020

तलब | ख़लल

आज बड़ी तलब है
तुम से बात करने की,
लफ़्ज़ों के लिहाफ़ मे लिपटी
मोहब्बते सिलसिलेवार नही उतरती,
धूप सी बिखर जाती हैं,
धान बन खिल उठती हैं,
खनकती हुई भीतर कहीं।
सोच थी मेरी
तुम तक पहुंचने की,
रूह से रूह को राहत है
रूमी की ऐसी रूमानी बातें
तलब को ख़लल कर गई।

Tuesday, 16 October 2018

तुम कब सीखोगे?

वो अकबर गुज़र गये,
जो अनारकली को दिवारों में चुनवा
तख्तनशीं रहे।
पर अनारकली के गीत,
दुर्गा की हुँकार का
वक़्त नही गुज़रता।
गवाह? अजी मेरी ज़मीं
- अच्छे दिन, ओछी हरकत
का बयानामा यहीं।
फिर ना कहना किसी ने समझाया नहीं
रेत, ग़ारा, ईंट लाते तुम्हे
मिट्टी-पलीत होने का मंज़र
दिखाया नहीं।

Monday, 2 July 2018

गंगा

एक नदी, कितनी राख
कब स्वाहा हुयी कहानियां
कुछ बह गयी
कुछ रह गयी 

उलझन

कल 
मेरे रुमाल की हर एक गाँठ
किसी ख़ास ख़्वाहिश की दास्ताँ थी
जिसमें तुम थे और मैं थी।
आज
खुली गाँठें, 
रुमाल की सिलवटों में
जिरह कर रहे हैं
जिसमे तुम हो और मैं भी।

Thursday, 3 March 2016

जे.एन.यू के लिये

(In solidarity, Hindi tr of my friend Akhil Katyal's poem' For JNU')

तुम सूरज चबा कर थूक सकते हो यहाँ,
मुस्टण्डों को धुल चटा सकते हो तुम यहाँ,
जनाब, विश्व विध्यालय की है बात यहाँ,
कोई राजा का दरबार नहीं, तलवों पर हो हम जहाँ !

Saturday, 20 June 2015

here and how

here, I inhabit my shame, 
wrapped in hurtful inadequacy
afraid to let go of words
that might tell you that.
how does a self-reliant woman
confess -
she erased her questions to nurture yours?