Monday, 30 November 2009

लुक्काछुप्पी

सर्दियो की हसीं रात थी;
चाँद घुमने निकला,
और चांदनी भी साथ थी;
ताज़ी हवा जैसी उसकी तासीर भी;
मदमस्त आँखें; और मस्ती भरे दिल की
कुछ शरारत से चाँद ने;
थामी उसकी कलाई,
चांदनी थोड़ा झिझकी; थोड़ा शरमाई,
चाँद बोला;
ऐसा क्या है, हर रोज़
रात भर चक्कर काट ;
क्यूँ तुम्हारे ही पास आता हूँ?
सब जगह ढूँढू, पर सुकून यहीं पाता हूँ?
चांदनी चुप थी,
हाथो में हाथ ले
आँख नीची; सांसो को बांधे;
थोड़ी लजायी;
थोड़ी सिमटी सी,
चाँद को निहारती रही,
मानो उसका बोलना ही;
उस रात की खुबसुरती थी
चाँद ने फ़िर कहा,
'बोलो तो;
कुछ जवाब तो दो'
चांदनी चुप रही
'देखो तुम्हारे हाथ में;
मेरा ही नाम लिखा है,
दुआ में जो उठे वो,
उनमें मेरा ही चेहरा खिला है'
चांदनी की चुप्पी से;
चाँद रूठ कर बोला,
'कुछ कहो तो?
तुम्हारे लिए ही,
मैंने हर हद तोड़ दी;
तुम्हे रिझाने को,
हर सूरत भी मोल ली;
इश्क में जहाँ सख्त
रस्मो रिवाजो का साया है,
कहाँ हर चाँद ने चांदनी को अपनाया है?
जानकर, चाँद समझेगा नही
चांदनी बोली,
'लफ़्ज़ो में कह दूँ,
ऐसा तो ये राज़ नही;
चार मिसालो में बयान हो;
ऐसा ये साथ नही;
पर्दों मैं बाँध कर हया की मंजिले
चाहते हो, ये मेरा मुस्तकबिल बने?
जिन रस्मो को तुमने लिखा
उन्हीं में तो बंधी हूँ
शिकायत फ़िर भी मुझसे
क्यूँ मैं चुप खड़ी हूँ
इश्क का कोई बयानमा नही
तुम हो यहाँ, और मैं भी यहीं;
इसी पल में जो ख़ामोशी थमी
वही है धडकनो की लुक्का छुप्पी'

Friday, 20 November 2009

a bit random

In a random mood
when u come to me
and sit still
holding the words in a queue,
biding your time;
you don't notice
I am merged in
some far away point;
embracing your gaze
without much ado.
You look ahead
at the future we can make;
and, i re live the past
we built together,
moments gone
in the spur of moments;
and so,
like the final act of a play
as you take my hand in yours;
and tell me how magical this bliss is
i wonder if this togetherness is here to stay.

Tuesday, 10 November 2009

खुदा

आज राह में, मेरा खुदा खो गया
कब हुआ, कैसे?
ये न पूछो मुझे
दोस्तो याद थी, सारी हिदायतें;
कबूल भी थी हमें,
वक्त की रवायतें;
पर कहानी ये कोइ,
नई तो नही;
तुम न पूछो मुझे;
क्या गलत क्या सही
संभाल कर ही तो मैंने,
बढाया कदम;
रंगीली खुमारी,
ने जब दाए सितम;
बेकस यकीन था;
बेखुद जबान,
सुनाया अचानक;
रुखसती का फरमान,
अभी जरा सा उछला ही था, दिल मेरा;
इश्क कमबख्त ने जब पलट दी निगाह
खुद तो कुछ किया ही नही;
उसने जो कहा बस सूना था वही,
वो चला तो रेत पे;
जैसे बन गए निशाँ,
निशानो से हकीकत का;
तय किया फासला,
बड़ी देर तक मन में,
चली ये जिरेह
वो वहां था,
और हम खड़े थे यहाँ;
टुकडो में आईना;
था, दरमियाँ
खुद को तो जाना,
यार को भी जान लिया;
और; नामालूम कैसे,
इस गुफ्तगू में;
अपना खुदा पा लिया

Saturday, 17 October 2009

पेंटोंविल्ले सड़क


लन्दन के कमरे में
४ * २ की खिड़की
टकटकी बाँध के निहारती
एक अदद सड़क
किंग्स क्रॉस से एंजेल जाते लोग;
कहीं जाते, कहीं से आते लोग
सुबह भी, शाम भी, रात में भी;
जागती सी सड़क
बादलो की छेड़छाड़,
हवाओं से तकरार,
बारिशो में
पानी झटक,बिजली सी दौड़ती कारो से;
पंगे लेती
लड़ कर, झगड़ कर
पैदल राहगीर को थाम,
साइकिल को भी जगह देती
पेंटोंविल्ले सड़क,
अब इस सड़क से पहचान लगती है
कुछ खास, कुछ आम, तमाम बात लगती है

Sunday, 2 August 2009

इश्क और मुश्क

ये फुरसतों का दौर है
ना ज़ार है, ना ज़ोर है
ये तंग रात पहेलियाँ
हमनवा हथेलियाँ
ये गुमशुदा हालात है
चंद हाथ थम गई
वफ़ा की वो सौगात है
तलाशियां हुई जहाँ
सिलसिले ना रुक सके
जो मय कदम बढ़ चले
उस मुफलिसी का दौर है
यहाँ मुखबिरो का शोर है
ना आम है, ना आदमी
ना राहतो को आज़मी
निजाम की ये हरकतें
तंग हसरतो का जाल है
फिराक ना, विसाल ही
उस इश्क का ज़माल है
जो मुश्क की मिसाल है!

Thursday, 9 July 2009

Be Friends with...


Friends i adore you,
you held my bits and pieces
like the warmth enveloped in folded sheets
Yet, I wonder
where are you now
as i run in these narrow streets,
to tell you the truth;
it comes much as a surprise
how you see my strengths,
and hear none of my cries.
you label me in colorful confines,
i wish i had a better language
to paint futility of such public tag lines;
possibly the crisis you see in me is true
perhaps in my vulnerability
i disappoint you in ways i can never outdo
yet i hope that some day you will hear my plea
and be friends with the most mediocre in me!

seduction


in each of my heartbeat
i live your tantrums
with each of my heartaches
i re-live them
amidst much salsa and jazz
i dance to be sane
while,
infinite possibilities
between the two
seduce me all over again

Sunday, 14 June 2009

गर्मी

झुलसा सा दिन,
और उमस भरी रात;
आम के पत्तो में,
ओस बेठी उदास;
फिर क्या था,
कव्वो ने भी;
चुप्पी साधी,
मैना का अब;
संगी न साथी,
आँगन में;
मूढा भी तुनका,
मुश्किल है अब;
खाना फुल्का,
पानी का भी;
राशन होता,
बिजली बचत का;
भाषण होता,
गर्मी में सब;
यही फरमाते,
कब हो बारिश,
कब निकले छाते!

cocktails n dreams!

Between cocktails and dreams
I drift along the margins
surreal fancies
masked realities
the need to find the meaning
and the meaning in the need
as pleasures go high on grief
i need not renew my vows
the promise remains
as it always was
cheering life and its schemes
between cocktails and dreams!

Sunday, 31 May 2009

तुम?

अच्छा तो अब,
अठकेलियाँ करती रातो के साथ
तुम भी इठलाते हो?
माना बहुत तेज हो,
बहती हवा जैसे;
पल में धुआं सा उड़ जाते हो,
लाख बार समझाने पर भी;
मन की ओट में;
अपनी जगह बनाते हो,
हाँ हाँ जानती हूँ,
तुम नखरा नही दिखाते,
पर सामने भी तो नही आते,
बस धीमे से;
उँगलियाँ चटखाते हो,
जानते हो,
मैंने चंदा से भी शिकायत की थी;
और तारो ने भी पहरेदारी की,
आख़िर कौन हो तुम
जो नैनो में
मस्तियाँ भर जाते हो?