Thursday, 29 December 2011

नदी में तलब है?

हाँ
नदी में तलब है,
धुंध बन शाखों पर सो जाने की;
जो है भी और नहीं भी,
फिर आगोशबंद
अज़ल उस लम्हे में खो जाने की;
जो हाज़िर भी हो और नाज़िश भी...

2 comments:

anand said...

badhia hai

chirag said...

sundar
nav varsh ki bahut bahut shubhkaamnaye
think positive