Monday, 25 May 2009

एक बात

एक बात तो बताओ,
हंसी के पैमानो में
मुझे तौलने से पहले
क्या तुमने पैमाना तौला था?
वो दोनो तरफ से खाली था,
जैसे बेफिक्र कोई सवाली हो?
या एक और से चमकता था,
मानो नोट कोई जाली हो?
एक बात तो बताओ,
जब मेरी हसीं से हँसते थे तुम,
तो आँसू कोई देखा था?
वो जो पलक से थमता भी नहीं,
झलक गिरता है;
और वो जो पलक में सँवरता भी नहीं,
फलक सिमटता है
चलो रहने दो, बस;
एक बात तो बताओ,
वो दिन रात था,
या वो रात दिन?
रेत का निशाँ था,
या चाँद चांदनी बिन
रास्तो पे आस थी,
या मंजर कोई हसीं?
मालूम हो,
हथेलियो पे जाम था,
फिर क्यूँ साकी
था सच नहीं?

1 comment:

Anonymous said...

ek baat to batao, haseen ke paimane par mujhe tolne ke pehle, kya tumne paimana tola tha...wah!!! wonderful!! _ akhil