Thursday, 17 October 2013

बरसात आ रही है

tr. from Chaoba Phuritshabam's English poem 'Rain Comes Down', from Tattooed With Taboos: An Anthology of Poetry by Three Women from North-East India (2011), p. 116

एक दशक पहले बरसात आई थी, एक साल पहले
बरसात आई थी इक बीते उदास दिन। 
हालांकि, इसने बस कोशिश की उसकी याद मिटाने की
उसकी ख़ता के बोझ बगैर, मुझे अकेले आगे बढाने की
भले ही, मैंने शिकायत नही की
उसके मेरे ख्वाबों को अचानक छोड़ जाने की
भले ही, मैंने उसे सवाल नहीं किया। 
रेत में धुंधलाते उसके पैरों के निशान छेडती मैं बस मुस्कुराई। 
जब जाड़ों में अचानक बारिश की बूँदे मेरे होंठों को नम कर जाती हैं
महसूस होती है मुझे मेरे आसपास तुम्हारी मौजूदगी,
ओह! कंही ये एक नए ख्वाब की शुरुआत तो नही ?

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